भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और समकालीन शिक्षा
Author : सत्य नरायन यादव
Abstract :
प्रस्तुत शोध पत्र "भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और समकालीन शिक्षा" के अंतर्संबंधों का गहन विश्लेषण करता है। वर्तमान वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य में, जहाँ सूचना और तकनीक की प्रधानता है, मानवीय मूल्यों और समग्र विकास की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ऐसे मेंराष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020के तत्वावधान में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनरुत्थान एक ऐतिहासिक आवश्यकता बनकर उभरा है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में प्राचीन भारतीय प्रज्ञा की प्रासंगिकता को सिद्ध करना, पाठ्यक्रम संरचना में इसके एकीकरण के व्यवहारिक मॉडल प्रस्तुत करना और इसके सफल क्रियान्वयन की चुनौतियों व संभावनाओं का परीक्षण करना है।
शोध के प्रथम चरण में यह रेखांकित किया गया है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल धार्मिक या पारंपरिक विश्वासों का पुंज नहीं है, बल्कि यह'पंचकोश'और'अष्टांग योग'जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है, जो छात्र के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। द्वितीय चरण में पाठ्यक्रम निर्माण की चर्चा की गई है, जिसमें गणित, विज्ञान, प्रबंधन और भाषा जैसे विषयों को उनके भारतीय मूल (जैसे- वैदिक गणित, आयुर्वेद, कौटिल्य का अर्थशास्त्र) के साथ जोड़कर एक 'भारतीय-केंद्रित' ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह दृष्टिकोण छात्रों में औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त कर मौलिक चिंतन और सांस्कृतिक गौरव को प्रोत्साहित करता है।
शोध का अंतिम खंड क्रियान्वयन की रणनीतियों पर केंद्रित है। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया है कि सफल क्रियान्वयन के लिएशिक्षक प्रशिक्षण (Capacity Building), डिजिटल संसाधनों का विकास और मूल्यांकन पद्धतियों में आमूल-चूल परिवर्तन अनिवार्य हैं। यह शोध पत्र इस तर्क को पुष्ट करता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही भारत को पुनः 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित कर सकता है। अंततः, यह अध्ययन शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के लिए एक दिशा-निर्देश प्रस्तुत करता है कि कैसे जड़ों से जुड़ी शिक्षा भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का समाधान बन सकती है I
Keywords :
भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), समग्र विकास, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पाठ्यक्रम एकीकरण, विश्व गुरु, प्रासंगिकता I