महिलाओं की राजनीतिक, प्रशासनिक एवं शासकीय भागीदारी: समानता के दावों और वास्तविक प्रतिनिधित्व के मध्य एक समालोचनात्मक अध्ययन (भारतीय परिप्रेक्ष्य में)
Author : Satpal Singh
Abstract :
भारतीय लोकतंत्र समानता, न्याय तथा सहभागिता के सिद्धांतों पर आधारित है। संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार, समान अवसर तथा सार्वजनिक जीवन में भागीदारी का अधिकार प्रदान करता है। महिलाओं के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 समानता एवं समान अवसर की गारंटी देते हैं, जबकि 73वें एवं 74वें संविधान संशोधनों द्वारा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। इसके अतिरिक्त संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न संवैधानिक एवं विधायी प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद राजनीतिक, प्रशासनिक एवं शासकीय संस्थाओं के उच्च स्तरों पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत सीमित दिखाई देती है।
यह शोध-पत्र महिलाओं की राजनीतिक, प्रशासनिक एवं शासकीय भागीदारी का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य संवैधानिक समानता के दावों और वास्तविक प्रतिनिधित्व के मध्य विद्यमान अंतर का परीक्षण करना है। शोध में गुणात्मक (Qualitative) तथा विश्लेषणात्मक (Analytical) शोध-पद्धति का प्रयोग किया गया है। अध्ययन मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों—सरकारी रिपोर्टों, जनगणना, नीति दस्तावेजों, शोध-पत्रों, पुस्तकों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों—पर आधारित है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किन्तु संसद, विधानसभाओं, मंत्रिमंडलों, उच्च प्रशासनिक सेवाओं तथा नीति-निर्माण संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाया है। अनेक मामलों में महिलाओं की भागीदारी केवल सांकेतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित रहती है, जबकि वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति पुरुष-प्रधान संस्थागत संरचनाओं के नियंत्रण में रहती है। सामाजिक रूढ़िवादिता, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, आर्थिक निर्भरता, राजनीतिक दलों द्वारा सीमित अवसर, चुनावी संसाधनों की असमान उपलब्धता तथा प्रशासनिक पदोन्नति में विद्यमान संरचनात्मक बाधाएँ महिलाओं की प्रभावी भागीदारी में प्रमुख अवरोध हैं।
यह शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि केवल संवैधानिक समानता अथवा आरक्षण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। वास्तविक लैंगिक समानता तभी स्थापित होगी जब महिलाओं को निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाओं में प्रभावी भूमिका, नेतृत्व के पर्याप्त अवसर तथा संस्थागत समर्थन प्राप्त होगा। इसलिए महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु राजनीतिक दलों, प्रशासनिक संस्थाओं तथा शासन व्यवस्था में व्यापक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है I
Keywords :
महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व, शासकीय सहभागिता, लैंगिक समानता, लोकतंत्र, सार्वजनिक प्रशासन, प्रतिनिधित्व, निर्णय-निर्माण I