हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के वैचारिक स्तंभ: क्रांतिकारी भगवती चरण वोहरा का ऐतिहासिक एवं सांगठनिक मूल्यांकन
Author : डॉ. अमित कुमार ताम्रकार
Abstract :
भगवती चरण वोहरा के लिए, क्रांति का अर्थ भारत में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक क्षेत्रों का पूर्ण रूपांतरण था। महान क्रांतिकारी भगवती चरण बोहरा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन प्रकाश-स्तंभों में से हैं, जिन्होंने न केवल वैचारिक धरातल पर क्रांति को परिभाषित किया, बल्कि अपने प्राणों की आहुति देकर उसे सींचा भी। वे 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के मुख्य रणनीतिकार, विचारक और प्रचारक थे। भारतीय सशस्त्र क्रांति का इतिहास प्रायः केवल पिस्तौल और बम की गूंज तक सीमित कर दिया जाता है, परंतु इस क्रांति के पीछे एक अत्यंत परिपक्व समाजवादी और बौद्धिक चेतना कार्य कर रही थी। भगवती चरण बोहरा इसी बौद्धिक चेतना के मुख्य केंद्र बिंदु थे। भगवती चरण वोहरा का गुप्त जीवन अत्यंत सक्रिय और जोखिमों से भरा था। दिल्ली असेंबली बम कांड के बाद वोहरा जी चंद्रशेखर आज़ाद के दाहिने हाथ बन गए। वे वैचारिक मोर्चे पर महात्मा गांधी जैसे वैश्विक नेताओं को तार्किक उत्तर देने में सक्षम थे और सांगठनिक स्तर पर दल की रीढ़ थे। मृत्यु के अत्यंत निकट होने पर भी उनके चेहरे पर दिव्य मुस्कान थी। उनकी शहादत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक ऐसी अपूरणीय क्षति थी, जिसने इतिहास की धारा को प्रभावित किया I
Keywords :
भगवती चरण वोहरा, नौजवान भारत सभा, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन, द फिलॉसफी ऑफ द बम, दुर्गा भाभी, समाजवादी क्रांति I