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भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से वर्तमान सशक्तिकरण तक एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author : सभ्या सोहनी और डॉ. धारा श्री श्रीवास

Abstract :

प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के बहुआयामी स्वरूप का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सफलता की कसौटी उसकी समावेशिता होती है, जिसमें महिलाओं की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के राजनीतिक सफर को ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ते हुए उनके वर्तमान सशक्तिकरण की स्थिति का मूल्यांकन करना है। अध्ययन के प्रथम चरण में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महिलाओं के अभूतपूर्व योगदान और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के संघर्ष को रेखांकित किया गया है। शोध विश्लेषण दर्शाता है कि स्वतंत्रता के पश्चात शुरुआती दशकों में महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक रही, किंतु 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण के माध्यम से जमीनी स्तर पर एक 'मौन क्रांति' का सूत्रपात किया। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (2023) का पारित होना नीति-निर्माण के शीर्ष स्तर पर महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है। शोध के निष्कर्ष इंगित करते हैं कि बढ़ती मतदान प्रतिशतता और विधायी निकायों में बढ़ती संख्या के बावजूद, पितृसत्तात्मक मानसिकता, राजनीति का अपराधीकरण और संसाधनों की कमी जैसी संरचनात्मक बाधाएं आज भी महिलाओं के मार्ग में बड़ी चुनौतियां हैं। यह अध्ययन सुझाव देता है कि वास्तविक सशक्तिकरण के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक सुधार और सामाजिक चेतना का विकास भी आवश्यक है। अंततः, यह शोध स्पष्ट करता है कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी केवल संख्यात्मक वृद्धि नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित राष्ट्र निर्माण का आधार है I

Keywords :

राजनीतिक भागीदारी, महिला सशक्तिकरण, पंचायती राज, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, समावेशी लोकतंत्र, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य